Friday, May 12, 2017

डा. अमरजीत कौंके को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2016

डा. अमरजीत कौंके को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2016
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साहित्य अकादमी, दिल्ली की और से पंजाबी के कवि, संपादक और अनुवादक डा. अमरजीत कौंके को वर्ष 2016 के लिए अनुवाद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. अमरजीत कौंके को यह पुरस्कार पवन करन की पुस्तक " स्त्री मेरे भीतर " के पंजाबी अनुवाद " औरत मेरे अंदर " के लिए प्रदान किया जाएगा. अमरजीत कौंके पंजाबी और हिन्दी साहित्य में जाने पहचाने कवि हैं. उनके 7 काव्य संग्रह पंजाबी में और 4 काव्य संग्रह हिंदी में प्रकाशित हो चुके हैं.अनुवाद के क्षेत्र में अमरजीत कौंके ने डा. केदारनाथ सिंह, नरेश मेहता, अरुण कमल, कुंवर नारायण, हिमांशु जोशी, मिथिलेश्वर, बिपन चंद्रा सहित 14 पुस्तकों का हिंदी से पंजाबी तथा वंजारा बेदी, रविंदर रवि, डा.रविंदर , सुखविंदर कम्बोज, बीबा बलवंत, दर्शन बुलंदवी, सुरिंदर सोहल सहित 9 पुस्तकों का पंजाबी से हिंदी में अनुवाद किया है. बच्चों के लिए भी उनकी 5 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.अमरजीत कौंके एक साहित्यक पत्रिका " प्रतिमान " के संपादक भी हैं जिसे वह 13 साल से लगातार निकल रहे हैं. अमरजीत ने पंजाबी और दूसरी भाषाओँ के अनुवाद से साहित्य के आदान प्रदान में एक पुल का काम किया है.साहित्य अकादमी के इस पुरस्कार के चयन के लिए गठित कमेटी में डा. जसविंदर सिंह, डा. जोध सिंह तथा डा.गुरपाल सिंह संधू शामिल थे. यह पुरस्कार साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित एक समागम में प्रदान किया जाएगा.इस सम्मान में 50,000 रूपए की राशि और सम्मान पत्र और चिन्ह शामिल हैं.








Thursday, December 8, 2011

मुठ्ठी भर रौशनी / अमरजीत कौंके



सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ अभी

शेष है अब भी
मुठ्ठी भर रौशनी
इस तमाम अँधेरे के खिलाफ

खेतों में अभी भी लहलहाती हैं फसलें
पृथ्वी की कोख तैयार है अब भी
बीज को पौधा बनाने के लिए..

किसानों के होठों पर
अभी भी लोक गीतों की ध्वनियाँ नृत्य करती हैं
फूलों में लगी है
एक दुसरे से ज्यादा
सुगन्धित होने की जिद
इस बारूद की गंध के खिलाफ

शब्द अपनी हत्या के बावजूद
अभी भी सुरक्षित हैं
कविताओं में

और इतना काफी है......

098142 31698

Friday, June 17, 2011

कुछ नहीं होगा / अमरजीत कौंके




कुछ नहीं होगा / अमरजीत कौंके

सब कुछ होगा तुम्हारे पास
एक मेरे पास होने के अहसास के बिना

सब कुछ होगा मेरे पास
तुम्हारी मोहब्बत भरी
इक नज़र के सिवा

ढँक लेंगे हम
पदार्थ से खुद को
इक सिरे से दुसरे सिरे तक

लेकिन कभी
महसूस कर के देखना
कि सब कुछ होने के बावजूद
कुछ नहीं होगा हमारे पास
उन पवित्र दिनों की मोहब्बत जैसा

जब मेरे पास कुछ नहीं था
जब तुम्हारे पास कुछ नहीं था.......

Friday, November 5, 2010

ख़ुशी / अमरजीत कौंके


ख़ुशी / अमरजीत कौंके

तुम खुश होती हो
मेरा गरूर टूटता देख कर

मुझे हारता हुआ देख
तुम्हें अत्यंत ख़ुशी होती है

मैं खुश होता हूँ
तुम्हें खुश देख कर

तुम्हें जीतता
देखने की ख़ुशी में
मैं
हर बार
हार जाता हूँ........

Saturday, October 16, 2010

मछलियाँ / अमरजीत कौंके




उस की उम्र में
तब आया प्यार
जब उसके बच्चों की
प्यार करने की उम्र थी
तब जगे
उसके नयनों में सपने
जब परिंदों के
घर लौटने का वक्त था

उसकी उम्र में
जब आया प्यार
तो उसे
फिश एकुएरियम में
तैरती मछलियों पर बहुत
तरस आया
फैंक दिया उसने
काँच का मर्तबान
फर्श पर
मछलियों को
आज़ाद करने के लिए

लेकिन
तड़प तड़प कर
मर गईं मछलियाँ
फर्श पर
पानी के बगैर

नहीं जानती थी
वह बावरी
कि
मछलियों को
आज़ाद करने के भ्रम में
उसने मछलियों पर
कितना जुलम किया है.....