Saturday, July 18, 2009

कुछ शब्द / अमरजीत कौंके


कुछ शब्द

लिखे थे
किसी और के लिए
पढ़े किसी और ने
समझा कोई और

पढ़ कर
भावुक कोई और हुआ
प्रभावित कोई और
गुस्से
कोई और हुआ
ख़ुशी हुई किसी और को

कुछ शब्द
जिस के लिए लिखे थे

सिर्फ उसी ने नहीं पढ़े ................

3 comments:

'अदा' said...

अमरजीत साहब,
ऐसा ही होता है जी, जिसके लिए लिखा हैं आपने न वो भी पढेगा,,,
आखिर कब तक बचेंगे उनकी नज़रों आपके ये जज़बात...
खूबसूरत अंदाज़-ऐ-बयान है आपका..
बेहतरीन..

vandana said...

lajawaab........amazing

pratbhjot kaur said...

kal website pae jaa kar aapka blog pada...kush prints bhi nikale...apki kavita KUCHH SHABAD kamaal ki hai.....