Tuesday, October 20, 2009

काश / अमरजीत कौंके



मेरा प्यार
तुम पर
इस तरह बरसता है
जैसे किसी पत्थर के ऊपर
लगातार
पानी का कोई
झरना गिरता है......
.........
........
........

काश !
तुम्हे कभी
किसी बृक्ष की भांति
बारिश में भीगने की
कला आ जाये .........

12 comments:

वन्दना said...

waah..........kya khoob likha hai.

shelly said...

amarjeet....again amazing......

rajni chhabra said...

bahut khub jeet ji. pyar ki baarish main nahaye darkht ki sunderta imagine ker rehi hoon,

ओम आर्य said...

काश !
तुम्हे कभी
किसी बृक्ष की भांति
बारिश में भीगने की
कला आ जाये .........
बादल जब छायेंगे तो मुझे भिंगना भी आ जायेगा,

ख्वाहिशे इतनी खुबसूरत क्यो होती है .........बहुत ही खुब!

pukhraaj said...

जब पानी लगातार पत्थर पर गिरता है तो उसके खुरदुरे किनारे टूट ही जाते हैं ....और फिर ये तो प्यार है ...
अति सुन्दर लिखा अमरजीत जी ....

sandhya said...

bahut sankhep shabdon me bahut gahre arth bhare hai....

gurpreet said...

ਬਹੁਤ ਖੂਬਸੂਰਤ ਹੈ !!! ਇਸ ਨੂੰ ਮੈ ਵਾਰ ਵਾਰ ਪੜ੍ਹਦਾ ਰਹਾਂਗਾ

Gurdeep Chahal said...

Sir es kavita lae her ek de muh vicho wah wah he nikle ge,sabaad a gea sir pad ke

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah....Behtareen Bhavabhivyakti.....

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना! प्यार को आपने शब्दों में बहुत ही सुंदर रूप से पिरोया है!
मेरे इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

SHYAM1950 said...

WONDER AMARJEET WONDER
जैसे किसी पत्थर के ऊपर
लगातार
पानी का कोई
झरना गिरता है..
KUCHH KAHNE KE LAYAK NAHIN CHHODA!
MAIN SAMAJHTA THA DUNIYA MEIN AKELA HOON PATHARON PAR BARSTA GIRTA .. YOU TOO!! TUM TO ABHI JAWAN HO YAR ..HA!HA!HA!

Poonam said...

Tusi jdon ve kush likhde ho hmesha hi aam ton khas ban janda ha.