Friday, August 21, 2009

तुम्हारे जाने के बाद / अमरजीत कौंके






तुम्हारे जाने के बाद
देर तक
दीवार पर सर
पटकता रहा कैलेंडर

पंखे के परों से
देर तक झरती रही उदासी

बहुत गहरा हो गया
मेरे कमरे में
फैला सन्नाटा

अचानक
उदास हो गई
सामने दीवार पर
मुस्कराती लड़की की तस्वीर

तुम्हारे जाने के बाद
कितनी ही देर
छटपटाता रहा
मेरे मन का
बेचैन मृग

तुम्हारे
फिर मिलने के
इंतज़ार में .............

4 comments:

vandana said...

kya baat hai ....gahre bhavon se bhari rachna.

दर्पण साह "दर्शन" said...

पंखे के परों से
देर तक झरती रही उदासी

बहुत गहरा हो गया
मेरे कमरे में
फैला सन्नाटा

अचानक
उदास हो गई
सामने दीवार पर
मुस्कराती लड़की की तस्वीर.....


Wah badhiya lekhan ke liye badhai sweekarein.

aap accha likhte hain.

अल्पना वर्मा said...

'उदासियों में भी इंतज़ार की आस लिए यह कविता अच्छी लिखी है.

Dr. Tripat said...

kya baat hai..bahut khoob dil ki gherai ko shabdon mein piro diya...maano mere hi liye ya kavita banaia ho...